बैकग्राउंड वेरिफिकेशन (BGV) का अर्थ है उन दस्तावेज़ों की जाँच या प्रमाणीकरण करना जो उम्मीदवार ने संगठन में शामिल होते समय दिए हैं।
यह केवल जन्म तिथि, शैक्षणिक योग्यताओं और अनुभव जैसे सहायक दस्तावेज़ों की जाँच तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी के आदेश और नौकरी की प्रकृति के अनुसार इसमें क्रेडिट स्कोर चेक, आपराधिक डेटाबेस वेरिफिकेशन और ड्रग टेस्ट भी शामिल हो सकते हैं। बैकग्राउंड वेरिफिकेशन करने की सर्वोत्तम प्रथाएँ:
सहमति के साथ और कानूनी रूप से:
BGV का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उम्मीदवार को यह बताना है कि संगठन में शामिल होने पर यह किया जाएगा। साथ ही, नकारात्मक रिपोर्ट आने की स्थिति में होने वाले परिणाम भी उम्मीदवार को समझाए जाने चाहिए। इससे दोनों पक्षों के बीच पारदर्शिता और भरोसा बनता है।
कंपनियों को क्लाइंट से दस्तावेज़ भरवाना चाहिए और संगठन को सूचीबद्ध जाँचें करने का अधिकार देने वाले हस्ताक्षर लेने चाहिए। (क्योंकि अधिकतर संगठन यह काम थर्ड-पार्टी वेंडरों को आउटसोर्स करते हैं)।

इससे उम्मीदवार की अपेक्षाएँ तय करने में मदद मिलती है और बर्खास्तगी या किसी विवाद की स्थिति में संगठन को कानूनी सुरक्षा भी मिलती है।
सतर्क और संपूर्ण रहें:
कर्मचारी किसी भी संगठन की महत्वपूर्ण संपत्ति होते हैं। बेहतर यही है कि प्रमाण-पत्रों की जाँच करवाते समय विशिष्ट और संपूर्ण रहा जाए। कंपनी के पास दस्तावेज़बद्ध BGV सूचियाँ होनी चाहिए जो पूरे संगठन में अनिवार्य हों, और साथ ही भूमिका या पद के कारण आवश्यक अतिरिक्त सूचियाँ भी। इससे कोई अस्पष्टता नहीं रहेगी और प्रक्रिया व्यक्ति-निर्भर नहीं होगी।
दस्तावेज़ीकरण:
हर रिपोर्ट एक तय पैटर्न का पालन करे और RED/YELLOW/GREEN जैसी हर टिप्पणी लिखित या दस्तावेज़ी साक्ष्य से स्पष्ट रूप से समर्थित हो। इससे विवादों के समाधान में मदद मिलती है।
उदाहरण: यदि किसी विश्वविद्यालय का प्रमाणपत्र नकली है, तो दस्तावेज़ या ईमेल का सिलसिला स्पष्ट रूप से स्थापित करे कि वह संबंधित विश्वविद्यालय/कॉलेज से ही जारी हुआ है।
गोपनीयता:
कंपनी को जमा किए गए हर कर्मचारी दस्तावेज़ को गोपनीय माना जाना चाहिए। और कंपनी तथा थर्ड-पार्टी वेंडरों, दोनों की ओर से उसकी सुरक्षा के लिए हर प्रयास किया जाना चाहिए। नतीजा चाहे जो हो, अंतिम रिपोर्ट भी पूरी तरह गोपनीय रखी जानी चाहिए, और केवल अधिकृत व्यक्तियों के बीच ही साझा या एक्सेस की जानी चाहिए।
संवाद या जानकारी का आदान-प्रदान:
काम के हर पहलू में संवाद महत्वपूर्ण है, और यही बात तब भी लागू होती है जब BGV रिपोर्ट नकारात्मक आती है। यह अत्यंत ज़रूरी है कि संगठन उम्मीदवार से बात करे और रिपोर्ट समझाए। ऐसी बातचीत में कोई भी स्पष्टीकरण, गलतफ़हमी आदि सुलझाई जा सकती है। इससे उम्मीदवार को अपना पक्ष रखने और किसी भी गलत रिपोर्टिंग को दूर करने का अवसर भी मिलता है।
BGV की आउटसोर्सिंग:
अधिकतर कंपनियाँ यह गतिविधि थर्ड-पार्टी वेंडर को आउटसोर्स करती हैं और इसे संभालने का यह सबसे अच्छा तरीका है। आउटसोर्सिंग के लाभ:
•ये किफ़ायती होते हैं।
•BGV कंपनियों के पास भौतिक पता वेरिफिकेशन, शैक्षणिक योग्यता वेरिफिकेशन आदि संभालने के लिए बेहतर नेटवर्क होता है।
•उनके पास सटीक और कुशल रिपोर्टिंग की विशेषज्ञता होती है।
•चूँकि वे यह गतिविधि रोज़ संभालते हैं, वे सुनिश्चित करते हैं कि कंपनी राज्य और केंद्र के कानूनों का कानूनी रूप से पालन करती रहे और किसी विवाद की स्थिति में सहायता के लिए अच्छी तरह दस्तावेज़ित साक्ष्य रखते हैं।
बाज़ार में यह गतिविधि संभालने वाली कई एजेंसियाँ हैं, लेकिन ऐसी एजेंसी चुनना उचित है जिसकी बाज़ार में बेहतर साख हो। केवल लागत देखकर निर्णय न लें।
